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पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिलकर संकल्प लेना होगा : पप्पू वर्मा

पटना (न्यूज सिटी)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिलकर लेना होगा संकल्प। पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्...


पटना (न्यूज सिटी)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिलकर लेना होगा संकल्प। पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने पौधारोपण करने के क्रम में कहा की पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को सहभागिता निभाने का वक्त है।









विदित हो कि पर्यावरण के अति क्षति होने के कारण बड़े पैमाने पर संसार की कई प्रजातियां आज विलुप्त होने के कगार पर है आज कई प्रकार के पशु पक्षी सिर्फ फोटो में ही दिख रहे हैं। पर्यावरण पर अधिक हमला होने के कारण आज वैश्विक स्तर पर पूरे विश्व को कई प्रकार के वायरस का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं के साथ क्रूरता मानव को दानव के रूप में बदल दिया है। आए दिन विकास के नाम पर सैकड़ो व हजारों वर्ष पुराना पेड़ को इनकी संरक्षण को बिना प्लानिंग किए हुए एक झटके में साफ कर दिया जा रहा है। पर्यावरण का अधिक दोहन के कारण आज मनुष्य का जीवन विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होकर नर्क के समान हो गया है।






https://youtu.be/Tv4tRxZOyLg




संतुलित व मानव अनुकूल पर्यावरण ने अपने आंचल में प्रत्येक प्राणी को जीवन व्यतीत करने के लिए समस्त साधन उपलब्ध करवाया है जो जीवन जीने के लिए अनिवार्य होता है। लेकिन एक समय के बाद मानवीय जीवन में हुई विज्ञान एवं प्रायोगिक प्रगति और तकनीकी घुसपैठ ने ना केवल मानवीय जीवन की दिशा को परिवर्तित करके रख दिया। अपितु पर्यावरण और प्रकृति का शुद्ध सात्विक रूप भी काफी हद तक विकृत कर दिया है। विकसित राष्ट्रों को यह चिंता है कि विकास की गति को वो अगर तेज नहीं करेंगे तो उनका राष्ट्र अधिक दिनों तक विकसित नहीं रह पाएगा। वहीं विकासशील राष्ट्र तो पहले से ही विकसित बनने के लिए हर संभव तरीके से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पर्यावरण समस्या की स्थिति इतनी जटिल होती जा रही है कि वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले संस्थाओं द्वारा पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। इनके द्वारा बनाई गई योजनाओं का अनुपालन भी ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है।









श्री वर्मा ने कहा कि अनियंत्रित होते पर्यावरण के कारण आज न केवल मनुष्य के जीवन पर आपदाएं आ रही है बल्कि इन आपदाओं के कारण पशु पक्षियों की प्रजातियां सदैव के लिए लुप्त होती जा रही है। यदि हम समय रहते सचेत नहीं हुए तो वह समय दूर नहीं जब मनुष्य को सांस लेना भी दूभर हो जाएगा। आज बाहर घूमते वक्त मास्क लगाकर सांसे लेना भी किसी उदाहरण से कम नहीं है। अब समझदारी इसी में है कि पर्यावरण के संकेत को समझकर पर्यावरण को बचाना ही हमारी समझदारी होगी।


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