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केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का निधन, 74 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

पटना (न्यूज सिटी)। केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया है। 74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। इस बात की जानका...


पटना (न्यूज सिटी)। केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया है। 74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। इस बात की जानकारी उनके बेटे व लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'पापा….अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं।'






https://twitter.com/iChiragPaswan/status/1314221533653467137?s=20




रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने राजनीति में एक लंबा समय बिताया है। रामविलास पासवान वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी इन सभी प्रधानमंत्रियों के ‘कैबिनेट’ में अपनी जगह बनाने वाले शायद एकमात्र व्यक्ति थे। 





आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। अभी कुछ दिनों पहले ही उनके दिल का एक ऑपरेशन भी हुआ था। यह बात भी चिराग पासवान ने ही ट्वीट कर शेयर की थी। चिराग पासवान ने अपने उस ट्वीट में इस बात का भी जिक्र किया था कि आने वाले दिनों में उनके पिता का एक और ऑपरेशन किया जाना था।





चिराग पासवान ने 4 अक्टूबर के अपने ट्वीट में लिखा था, "पिछले कई दिनों से पापा का अस्पताल में इलाज चल रहा है। कल शाम अचानक उत्पन्न हुई परिस्थितियों की वजह से देर रात उनके दिल का ऑपरेशन करना पड़ा। ज़रूरत पड़ने पर संभवतः कुछ हफ्तों बाद एक और ऑपरेशन करना पड़े। संकट की इस घड़ी में मेरे और मेरे परिवार के साथ खड़े होने के लिए आप सभी का धन्यवाद।"





राजनीति की नब्ज पकड़ने वाले रामविलास पासवान लगभग पांच दशक तक बिहार और देश की राजनीति में छाये रहे और 1946 में बिहार के खगड़िया में जन्मे रामविलास पासवान ने एक छोटे से इलाके से निकलकर दिल्ली की सत्ता तक का सफर अपने संघर्ष के बूते तय किया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगभग पांच दशक तक वो बिहार और देश की राजनीति में छाये रहे। 





बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने लालू प्रसाद यादव ने रामविलास पासवान को ‘मौसम वैज्ञानिक’ का नाम दिया था। रामविलास पासवान हवा के रुख के साथ राजनीति के अपने फैसले बदलने में माहिर थे। इसमें वो कामयाब भी रहे। इसी का नतीजा रहा कि उन्होंने छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया। 





‘ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर’ इस कहावत को रामविलास पासवान ने चरितार्थ किया। वह बेहत सरल और मृदुभाषी थे। बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से वह कई बार चुनाव जीते, लेकिन दो बार उन्होंने सबसे अधिक वोट से जीतने का रिकॉर्ड बनाया। 


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