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जदयू का पलटवार, कहा - महागठबंधन का बिहार में मानव श्रृंखला पूरी तरह से फेल रही

पटना। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि मानव श्रृंखला पूरी तरह से फेल रही। इसमें किसानों का कहीं कोई अता-पता नहीं था। बिहार में किस...


पटना।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि मानव श्रृंखला पूरी तरह से फेल रही। इसमें किसानों का कहीं कोई अता-पता नहीं था। बिहार में किसानों को उकसा कर विपक्ष अपनी दाल नहीं गला सकता है। बिहार के विपक्ष के द्वारा किसान आंदोलन के समर्थन में मानव श्रृंखला का आयोजन किया गया, इससे गैर जिम्मेदाराना नजरिया नहीं हो सकता है। वैसे लोगों का समर्थन करना जिन्होंने किसान आंदोलन के नाम पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में अफरा-तफरी और अराजकता की स्थिति पैदा की उनकी कठोरतम शब्दों में भर्त्सना करने के बजाए उनका साथ देना कहीं ना कहीं देश के साथ धोखा है। 


श्री प्रसाद ने कहा कि किसान आंदोलन के समर्थन में मानव श्रृंखला का निर्माण करने वाले महागठबंधन के नेताओं को सबसे पहले  बिहार की जनता को यह बताना चाहिए कि आजादी के इतने सालों में उन्होंने किसानों की भलाई के लिए कौन से काम किए। उनके कौन सी ऐसी नीतियां थी जिनके कारण किसान आज भी आत्महत्या करने को मजबूर है। देश में सर्वाधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियों की नीतियों के कारण किसानों की स्थिति इतनी दयनीय है। एक तरफ तो राजद के युवराज किसानों का हमदर्द होने का झूठा ढोंग करते हैं वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ किसानों की जमीन हथियाने के कई आरोप लगे हैं। श्री प्रसाद ने कहा कि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में बिहार में किसानों की भलाई के लिए अनेक कल्याणकारी कार्य किए जा रहे हैं। चाहे वह कृषि के लिए डेडिकेटेड फीडर की बात तो या फिर हर खेत को पानी देने की बात हो। फिर चाहे बीज, कीटनाशक एवं उर्वरक के लिए आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन की बात हो हमारी सरकार ने किसानों के हितों का हमेशा ख्याल रखा है। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार के निर्णय में धान की खरीद की समय सीमा को 31 जनवरी से बढ़ाकर 21 फरवरी कर दिया है। नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में बिहार का किसान देश के अन्य राज्यों से ज्यादा खुशहाल है। उन्होंने कहा कि बिहार के किसान विपक्ष के किसी भी उकसावे में नहीं आने वाले हैं और महागठबंधन के कार्यकर्ताओं को किसान बताया जाना कहीं ना कहीं किसानों का अपमान है।

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