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पटना सिटी में भाकपा माले ने संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर किया चक्का जाम

पटना सिटी। किसानों को गुलाम बनाने वाली तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ वापस लेने कि मांग व एमएसपी को कानूनी दर्जा के लिए देश भर में चल रहे किसा...


पटना सिटी।
किसानों को गुलाम बनाने वाली तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ वापस लेने कि मांग व एमएसपी को कानूनी दर्जा के लिए देश भर में चल रहे किसान आंदोलन व दिल्ली को लगातार 71 दिनों से घेर कर धरना पर बैठे किसानों के आंदोलन को बल प्रदान करने व समर्थन में आज संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आहवान पर राष्ट्रव्यापी चक्का जाम कार्यक्रम पटना सिटी के भगत सिंह चौक को एक घंटा जाम कर किसानों ने आंदोलन को समर्थन दिया। कार्यक्रम में सैंकड़ों किसान पटना के जल्ला क्षेत्र से आए भाकपा माले कार्यालय, मंगल तलाव के पास इक्कठा हो कर जुलूस के रूप में चौक पहुंचा। जहां चौराहे को एक घंटा जाम किया जो 2 बजे से तीन बजे तक चला। जाम कार्यक्रम के दौरान सभा की गई जिसकी अध्यक्षता भाकपा माले पटना सिटी सचिव कॉमरेड नसीम अंसारी ने किया। 

बतौर मुख्य वक्ता व कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे भाकपा-माले के विधायक दल नेता कॉमरेड महबूब आलम ने कहा कि इस देश को जिन मज़दूर-किसानों ने बनाया आज वही जब देश की राजधानी दिल्ली में प्रवेश कर रहे थे तो लोग जहां उनके स्वागत में फूल बरसा रहे थे वहीं दिल्ली पुलिस के जवान उन पर लाठियां बरसा रही थी। बीते दशकों में देश में आए अकाल का हवाला देते हुए भाकपा-माले विधायक ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों का गला घोंटकर संसद से पास कराए गए ये तीनों कृषि क़ानून अमल में जाएंगे तो धीरे-धीरे जन वितरण प्रणाली ख़त्म हो जाएगी और इस देश की 70 फीसद से भी अधिक लोगों की थाली से भोजन छिन जाएगा। इस तरह देश एकबार फिर अकाल की चपेट में आ जाएगा और लोग भूखे मरने को मजबूर हो जाएंगे जिसकी आशंका बार-बार अर्थशास्त्री जता चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेज हमारे देश में व्यापार करने आए थे और धीरे-धीरे पूरे देश को ग़ुलाम बना दिया, उसी तरह मोदी सरकार एक-एक कर इस देश की सारी सार्वजनिक संपत्ति पूंजीपतियों के हाथों बेचकर देश में कंपनी राज स्थापित करते हुए एक बार फिर से इस देश को गुलाम बनाना चाहती है। किसान आज देश को उसी गुलामी से बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। किसानों की यह लड़ाई महज खेती-किसानी बचाने की नहीं, इस देश की आज़ादी और संविधान बचाने की लड़ाई है। लोगों से आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे किसानों के आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए भाकपा-माले विधायक ने आह्वान किया कि पूरी देश के आम अवाम को किसानों के इस आंदोलन में रोड पर उतरना चाहिए। 


किसान महासभा के राज्य सह सचिव कॉमरेड राजेन्द्र पटेल ने कहा कि किसान न सिर्फ खेती व किसानी को बचाने का संघर्ष कर रहे बल्कि संविधान व लोकतंत्र के साथ रोटी बचाने का भी संघर्ष कर रहे है। कृषि कानूनों को किसान विरोधी और जन विरोधी बताते हुए उन्होंने एलान किया कि जब तक ये क़ानून वापस नहीं होंगे, किसान घर वापस नहीं जाएंगे। लिहाजा किसानों के इस संघर्ष में हमारा-आपका एकजुट होना ज़रूरी है। 

अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश सह सचिव उमेश सिंह ने मोदी सरकार को आपदा में अवसर ढूंढने वाली सरकार बताते हुए कहा कि इस कोरोना महामारी के दौर में जहां दूसरे देश की सरकार अपने देश के लोगों के जान-माल की रक्षा में लगी है, वहीं हमारे देश की मोदी सरकार तमाम सार्वजनिक चीजों का निजीकरण कर देश बेचने में लगी है। रेल, तेल , एयरपोर्ट सब बेच दिया और एलआईसी के बाद अब बैंकों के बेचने की तैयारी चल रही है। हम संकल्प लेते हैं कि हम अपने देश, अपनी आज़ादी को ख़त्म नहीं होने देंगे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए उपाध्यक्ष शंभूनाथ मेहता ने कहा कि आज अगर मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान-महिला राजनीति नहीं करेंगे तो कौन करेगा। किसानों के साथ खड़ा होना ही आज का सच्चा राष्ट्रप्रेम है। किसान आंदोलन से व्यापक समाज का जुड़ाव हो यह आज हम सबकी ऐतिहासिक जिम्मेदारी हो गयी है। जब तक सरकार ये काले क़ानून वापस नहीं लेती, इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। 

इस दौरान कार्यक्रम में कांग्रेस के विनोद अवस्थी और सुजीत कसेरा भी शामिल थे। इनके अलावा कार्यक्रम में भाकपा माले से जुड़े किसान नेताओं में मनोहर लाल, अनय मेहता, सुरेश प्रसाद, डाक्टर धीरज मेहता, ललन यादव, रामनारायण सिंह, बाल्मीकि माडल, उमेश मंडल, राजेश मेहता, रखी मेहता, श्रवण सिन्हा, रंजन मेहता, श्रवण मेहता, चंद्रभूषण शर्मा, मनोज तिवारी, जगरनाथ मेहता, संजय मेहता, सूरज कुमार, जावेद एवं एहतेशाम के साथ सैंकड़ों किसान शामिल थे।

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