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कहीं से किसान विरोधी नहीं है किसान बिल: आरसीपी सिंह

पटना।   जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में दल के नेता श्री आरसीपी सिंह ने आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ...


पटना।
 जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में दल के नेता श्री आरसीपी सिंह ने आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए किसान बिल के संबंध में कहा कि ये तीनों बिल कहीं से किसान विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्व के वक्ता ने इसकी तुलना बिहार के चंपारण आंदोलन से की जिसका नेतृत्व पूज्य बापू ने किया था, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि चंपारण आंदोलन इसके लिए हुआ था कि वहां अंग्रेज किसानों से नील की खेती जबरदस्ती करवाते थे। क्या इन तीनों बिल में कहीं इस बात की चर्चा है कि किसान सरकार द्वारा बताई किसी चीज की खेती करे? इन तीनों बिल में कहीं ऐसी चर्चा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि खेड़ा आंदोलन या बारदोली आंदोलन को ही लें तो ये आंदोलन लगान को लेकर हुए थे। बता दीजिए कि इन तीनों बिल में कहीं लगान का कोई मुद्दा है?

 
श्री आरसीपी सिंह ने आगे मंडी को लेकर कहा कि मैं बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों जगहों पर रहा, दोनों जगहों पर मंडी परिषद भ्रष्टाचार का अड्डा हुआ करती थीं। बिहार में जब हमारी सरकार आई, हमने एपीएमसी एक्ट को खत्म किया और आज उसका परिणाम देखिए। 2005 में बिहार में अन्न का उत्पादन 81 लाख टन था, आज 181 लाख टन है। प्रोक्योरमेंट की बात करें तो वो भी बहुत कम था। आज केवल धान के लिए हमारा लक्ष्य 45 लाख टन का है। प्रोडक्टिविटी की बात करें तो मक्के का उत्पादन 135%, धान का 119% और गेहूँ का 118% बढ़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दे पर लोगों को हरगिज कन्फ्यूज न करें।
श्री आरसीपी सिंह ने किसान बिल के पहले कानून की चर्चा करते हुए कहा कि पहला कानून कहता है कि किसान के पास अपनी उपज बेचने की आजादी है। इसके लिए उस पर कोई रोक नही है, वो पूरी तरह स्वतंत्र है। इसी तरह दूसरे कानून के संदर्भ में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की बात करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार, यूपी में तो अभी भी इन्फॉर्मल कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग हो रही है। बटाई आखिर है क्या? उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट इन्फोर्स नहीं होता, बल्कि इसमें आपका अपना विलिंगनेस होता है। अगर इससे किसान को सहूलियत होगी, उसकी आमदनी बढ़ेगी तो वो कॉन्ट्रैक्ट करेगा, नहीं तो नहीं करेगा। इसी तरह तीसरे कानून एसेंसियल कमोडिटी एक्ट के संबंध में उन्होंने कहा कि ये 1954-55 में आया था। वो स्कारसिटी का जमाना था। उस समय जब देश में बाहर से अनाज आता था तब हम लोगों को खिला पाते थे। आज खाद्यान्न, फल, सब्जी के उत्पादन में हम सरप्लस में हैं।
श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि तीनों बिल कहीं से किसान विरोधी नहीं है, लेकिन अगर लगता है कि उसमें और सुधार की जरूरत है तो बैठकर बात करें। आपसी संवाद करें। उन्होंने कहा कि लोहिया जी ने कलही राजनीति से ऊपर उठने की बात करते थे। हमें इसे समझने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सरकार वार्ता के लिए बुला रही है, लेकिन आपलोग सरकार को ही हठधर्मी बता रहे हैं। अपनी हठधर्मिता को देख ही नहीं रहे। आखिर आपलोगों को बात करने से कौन रोक रहा है? आइए बात कीजिए। कैसे किसानों की आमदनी बढ़े, कैसे हमारी खेती लाभकर हो, कैसे कृषि को लोग नहीं छोड़ें, इस पर चर्चा होनी चाहिए। इसके लिए हमेशा सब जगह लोगों को भाग लेना चाहिए। 
श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि हमलोगों के लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हो रही हैं और लोकतंत्र में संपर्क और संवाद सबसे महत्वपूर्ण है, इसको खत्म नहीं होने देना चाहिए। मेरा सबसे अनुरोध होगा कि अपने-अपने संपर्क के लोगों से संवाद स्थापित करें और समस्या का निदान ढूंढ़ें। किसानों का जीवन कैसे खुशहाल हो, हमारा देश कैसे तरक्की करे, इस पर चर्चा होनी चाहिए। अपनी हठधर्मिता और कलही राजनीति छोड़नी चाहिए और मिलजुलकर राजनीति करनी चाहिए।श्री आरसीपी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शास्त्रीजी ने जय जवान जय किसान का नारा दिया था और अटलजी ने उसमें जय विज्ञान जोड़ा। आज कितनी प्रसन्नता की बात है कि हमारा एचएएल (हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) 83 तेजस विमानों को बनाएगा। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों का काम हमें गौरव से भर देता है। स्पेस की ही बात करें तो आज हम बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। हमें अपने जवानों, किसानों और वैज्ञानिकों पर गर्व होना चाहिए।
कोरोना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देश की मोरटेलिटी रेट 2% के आसपास है और भारत में 1.5% के आसपास। अमेरिका की आबादी 30 करोड़ है और हमारी 130 करोड़। फिर भी वहां 2.29 करोड़ लोग संक्रमित हुए, जबकि हमारे यहां 1.07 करोड़। उनका रिकवरी रेट 64% और हमारा 97% है। और तो और जिस बिहार को लोग कभी कोसा करते थे, आज वहां का मोरटेलिटी रेट .5% (आधा प्रतिशत) है। कोरोना काल में बाहर से बिहार आने वाले 24 लाख श्रमिकों की देखभाल हमने की। इस दौरान हमारी सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए केन्द्र सरकार के अतिरिक्त खर्च किए। कोरोना वैक्सीन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह गौरव का विषय है कि हमारे वैज्ञानिकों ने साल भर के अंदर वैक्सीन बनाया। इस बात के लिए हमें और गर्व होना चाहिए कि हमारे यहां बनी वैक्सीन की कीमत बाहर के वैक्सीन से कई गुना कम है। हमें अपने वैज्ञानिकों को सैल्यूट करना चाहिए और केन्द्र सरकार को धन्यवाद देना चाहिए। इस महामारी में हमारी सरकार ने जिस सफलता के साथ हमें नेतृत्व दिया, उसके लिए हमें गौरव होना चाहिए।
श्री आरसीपी सिंह ने कहा कि हमारे देश का गौरवशाली इतिहास रहा है और आगे भी रहेगा। इसके लिए हमारे देश का जो ताना-बाना है, सामाजिक सद्भाव, साम्प्रदायिक सौहार्द्र है, वो कायम रहना चाहिए। ताकि आगे भी हम गर्व से कह सकें – सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

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