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बाल और नाखून को छोड़ कर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है टीबी 

अररिया। टीबी को लेकर लोगों में कई तरह की धारणा है। आमतौर पर बाल और नाखून को छोड़ कर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है टीबी लोगों की यह ध...


अररिया।
टीबी को लेकर लोगों में कई तरह की धारणा है। आमतौर पर बाल और नाखून को छोड़ कर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है टीबी लोगों की यह धारणा है कि टीबी यानि क्षय रोग सिर्फ हमारे फेफड़ों को प्रभावित करता है। जो पूर्णता सही नहीं है। बाल और नाखून को छोड़कर टीबी हमारे शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। खास बात यह है कि टीबी किसी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। इसी माह 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस का आयोजन होना है। लिहाजा टीबी रोग के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए इसके उपचार के लिये उपलब्ध सुविधाओं से अवगत कराने के लिये पूरे महीने विभिन्न तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाने हैं। स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर जरूरी तैयारियां शुरू कर चुका है। 

हवा के माध्यम से फैलते हैं टीबी के जीवाणु : 

टीबी एक घातक संक्रामक रोग है। इसके संबंध में जानकारी देते हुए जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ वाईपी सिंह ने कहा टीबी की बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु से फैलता है। टीबी के जीवाणु आम तौर पर फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। लेकिन यह फेफड़ा के साथ शरीर के कई अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है। जब टीबी संक्रमित मरीज खांसता, छींकता या बोलता है तो उनके मुँह से निकले जीवाणु हवा में फैल जाते हैं। टीबी के जीवाणु हवा में कई घंटों तक सक्रिय रह सकते हैं। इस दौरान हवा के माध्यम से ये किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। इसलिए टीबी संक्रमित मरीजों को नियमित रूप से मास्क पहनने की सलाह दी जाती है। साथ ही बोलते व छींकते वक्त उन्हें अपने मूंह ढक कर रखने को कहा जाता है। 

हड्डियों पर होता है टीबी रोग का गहरा असर : 

टीबी का इलाज सही समय पर नहीं कराने व बीच में ही इलाज छोड़ देने के कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सीडीओ डॉ वाईपी सिंह के मुताबिक इससे स्थायी अपंगता का खतरा अधिक होता है। आमतौर पर टीबी के जीवाणु फेफड़ों को प्रभावित करते हैं. लेकिन हड्डियों पर भी यह रोग का गंभीर असर छोड़ सकता है। बोन टीबी को अक्सर लोग अर्थराइटिस समझने की भूल करते हैं। जबकि दोनों में बेसिक अंतर यह है कि अर्थराइटिस के मरीज रात में सोते समय दर्द में राहत महसूस करते हैं। इसके ठीक उलट टीबी के मरीजों में रात में सोते समय बैक्टेरिया की गतिविधि बढ़ने से अधिक दर्द का एहसास होता है।

रोग के लक्षणों की पहचान व इसका तत्काल इलाज जरूरी :

बुखार, थकान, रात में पसीना आना व बेवजह वजन कम होना टीबी रोग से जुड़े लक्षण हो सकते हैं। हड्डी के किसी एक बिंदु पर असहनीय दर्द का होना, बोन टीबी के खतरों की ओर इशारा करता है। सीडीओ ने बताया कि इससे धीरे-धीरे मरीज का बॉडी पॉश्चर व चलने का तरीका बिगड़ने लगता है। कंधे झुकाकर चलना, आगे की ओर झुक कर चलना, बॉडी मूवमेंट में परेशानी, हाथ-पांव में कमजोरी का एहसास बोन टीबी के लक्षण में शामिल हैं। दर्द का प्रकार क्षयरोग के सटीक स्थान पर निर्भर करता है। मसलन, स्पाइन टीबी के मामले में पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है। लिहाजा सही समय पर रोग की पहचान करते हुए इसका उपचार कराना जरूरी है। टीबी का इलाज सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में नि:शुल्क है। इसके अलावा मरीजों को सरकार द्वारा कई जरूरी मदद उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है।

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